शुक्रवार, 16 मार्च 2012

छोटे शहर की सुवरीन गुग्गल



चैनल वी ने सुवरीन गुग्गल: टॉपर ऑफ द ईयर के शुभारंभ की घोषणा की जो एक छोटे शहर की लड़की और एक बड़े शहर में उसके रोमांच की दिलचस्प कहानी है। यह एक प्रेरणादायक कहानी है जो बताती है कि यह पीढ़ी आइपॉड और लो वेस्ट जींस से कुछ ज्यादा है। कई गुना उम्मीदों, साथियों के दबाव, माता-पिता की समस्याओं, कॉलेज की राजनीति और किशोरों की चिंता की पृष्ठभूमि में सेट यह उन युवाओं की गाथा है जो दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज डीपीएससी में पढ़ते हैं जो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है जो कैम्पस में बदलाव की एक धारा का नेतृत्व करता है। सुवरीन दुग्गल काठगोदाम से आयी एक सीधी-सादी, नैतिक, हंसमुख और दृढ़ लड़की है। उंची अपेक्षाओं वाली यह मध्यमवर्गीय लड़की बड़े शहर की जिंदगी में जुनून के साथ प्रवेश करती हैै। सच्चाई की कठोरता का सामना होते ही उसके सपने टूटने लगते हैं लेकिन सुवरीन का धैर्य उसे अपने सपनों को पूरा करने और उन लड़कों के ग्रुप में करिश्माई बनने की प्रेरणा देता है जिनके सपने कुछ नम्बरों से टूट गये हैं। वह सभी बाधाओं के खिला फ लड़ती है और हजारों विद्यार्थियों के लिये उम्मीद की किरण बनती है। प्यार और कॉलेज की राजनीति मंे बंटी यह दिलचस्प और मजाकिया कहानी 19 मार्च 2012 से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिये पूरी तरह तैयार है।
कार्यकारी उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक प्रेम कामथ ने शो के शुरुआत की घोषणा करते हुये कहा, ‘‘अधिकांश भारतीय युवा सपने देखने वाले हैं और दूसरों के सपनों को जीने वाले हैं, चाहे वह मां बाप हों, दोस्त हों या फिर पॉपुलर संस्कृति हो। सुवरीन गुग्गल एक छोटे शहर की लड़की के सपनों और उसकी उम्मीदों का सामना करती है और दोस्तों व मां बाप के दबावों को तोड़ने की कोशिश करती है। यह एक हल्का फुल्का मनोरंजक ड्रामा है जिसमें उसके एक छोटे शहर से दिल्ली की हाइ कॉलेज लाइफ तक के उतारों चढ़ावांे को दिखाया जायेगा। सुवरीन का मुख्य किरदार 12/24 करोलबाग (ज़ी टीवी) से प्रसिद्ध हुयी स्मृति कालरा निभाएंगी। शो के बारे में बोलते हुये स्मृति ने कहा, ‘‘चैनल वी जो पहले एक म्यूजिक चैनल था, अब अपने दर्शकों को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने के लिये फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों श्रेणियों में शो की एक श्रृंखला का प्रसारण कर रहा है। 19 मार्च को आप उम्मीद से भरी और मुस्कराती हुयी सुवरीन गुग्गल को देखेंगे जो इधर-उधर घूमती है और वे सवाल पूछती है जो आपके दिमाग में रहते हैं और जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। सुवरीन गुग्गल अपने चुलबुले और शरारती तरीकों से उनका समाधान निकालती हैं। सुवरीन का किरदार बहुत रोचक और लुभावना है जिससे युवा बहुत आसानी से कनेक्ट कर सकते हैं।’’
मशहूर अभिनेता अक्षय आनंद सुवरीन के पिता की भूमिका में होंगे। शो को निर्माण फोर लायन्स प्रोडक्शन द्वारा किया जा रहा है।

भारत और पाकिस्तान में कैलाश खेर


गायक कैलाश खेर अपने एलबम ‘रंगीले’ के प्रचार व प्रसार के सिलसिले में पूरे भारत के दौरे में व्यस्त हैं लेकिन ऐसी व्यस्तता में से कुछ वक्त निकाल कर वो १८ मार्च यानि रविवार को ढाका में भारत व पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच में अपने गीतों को गायेगें. कैलाश जी ने ‘अल्लाह के बंदे’ के हिट होने से भी पहले सन २००३ में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में ‘छूना है आसमान’ जिंगल को गाया था.

कैलाश खेर से क्रिकेट के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि, “क्रिकेट के बारे में मुझे बहुत ज्यादा नही मालूम लेकिन जब भी कभी मुझे समय मिलता है मैं क्रिकेट देखता हूँ. क्रिकेट स्कोर के बारे में अपडेट रखता हूँ. मैंने सन २००३ में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में ‘छूना है आसमान’ जिंगल को गाया था और अब फिर से ९ साल बाद इन दोनों टीमों के लिए गा रहा हूँ.’’

कैलाश जी से पूछने पर आप कौन सी टीम को अपनी शुभ कामनाएं देगें ? उन्होंने कहा कि ‘निस्संदेह अपनी भारतीय टीम को और किस टीम को. लेकिन मैं आपको बता दूं कि पाकिस्तान टीम में भी बहुत सारे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ और जो मेरे गीतों को सुनते हैं.”

गुरुवार, 15 मार्च 2012

आभास का फटा कुर्ता


स्टार परिवार अवार्ड्स 2012 में भागीदारी कर पहली बार इसका हिस्सा बन रहे इस प्यार को क्या नाम दूं के आभास उर्फ श्याम को एक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
जैसा कि हम सब जानते हैं कि आभास शो में नकारात्मक किरदार निभाते हैं लेकिन असली ज़िंदगी में वह बहुत मस्तीपसंद इंसान हैं। यह अभिनेता पूरी टीम के साथ पुरस्कार समारोह में आने को लेकर बहुत उत्साहित था और यह प्रतिभाशाली अभिनेता जब भी मंच पर गया, अपने टीम के सदस्यों को हंसाने की कोशिश की लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं लगा कि उन्होंने अपना कुर्ता फाड़ लिया है। इस समस्या का पता उन्हें तब चला जब उन्होंने खुद को टीवी स्क्रीन पर अपने प्रदर्शन के दौरान कुशी के लिये कूदते और हंसते देखा। जहां समारोह में मौजूद हर व्यक्ति हंस रहा था, वहीं आभास ने पता चल जाने के बावजूद और ज्यादा ऊर्जा से अपना कार्यक्रम जारी रखा।


इंटरनेशनल भाभो !


दिया और बाती हम में भाभो की भूमिका निभाने वाली नीलू आजकल बहुत खुश हैं और उनकी खुशी का कारण है उनके प्रशंसकों की बढ़ती संख्या। अभी हाल ही में मुंबई में हुये स्टार परिवार अवार्ड्स में दुनिया के कोने-कोने से एक प्रतियोगिता के भाग्यशाली विजेताओं को उनके पसंदीदा सितारों से मिलाने रेड कार्पेट पर लाया गया।
जहां सभी अपने पसंदीदा सितारों से मिल कर खुश थे वहीं सभी के मन में अपनी सबसे पसंदीदा सास भाभो से मिलने की प्रबल इच्छा देखी गयी। यूके से आये उनके एक प्रशंसक ने तो यहां तक कहा, ‘‘मेरी यात्रा अधूरी रहती अगर मैं आपसे नहीं मिला होता। मेरा पूरा परिवार और सभी दोस्त बैठकर सिर्फ आपके लिये दिया और बाती हम देखते हैं।
इस बात से भावुक नीलू ने कहा, ‘‘आज मैंने वास्तव में पुरस्कार जीता है जो पूरी ज़िंदगी मेरे साथ रहेगा।’’

बुधवार, 14 मार्च 2012

मिका ने उठाया कई रहस्यों पर से पर्दा


सब टीवी पर प्रसारित हो रहे शो मूवर्स एण्ड शेकर्स में 19 मार्च को संगीत की दुनिया के सनसनीखेज, दिलचस्प तथा हर दिल अजीज पॉप गायक मिका सिंह नजर आयेंगे। इस शो में मिका खुद से जुड़े रहस्यों पर से पर्दा उठायेंगे और अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपनी सफाई पेश करेंगे। मिका ने इन दिनों धमाल मचा रखा है, क्योंकि उनके गाने इन दिनों धूम मचा रहे हैं। ‘प्यार का पंचनामा‘, ‘रेडी‘, ‘देसी ब्वॉयज‘ इत्यादि फिल्मों में उनके गाने काफी लोकप्रिय हुये हैं और लोगों की जुबान पर चढ़ गये हैं। मिका सच्चे मायने में मूवर एण्ड शेकर हैं।
शेखर सुमन के साथ बातचीत की शुरूआत मिका ने ड्रम बजाते हुये की और उनका साथ दे रहे थे रबर बैंड के सुरिन्दर। इस शो की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि शेखर सुमन को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ी। एक तो वह इस शो के होस्ट थे ही, दूसरा उन्हें मिका का बॉडीगार्ड भी बनना पड़ा। दो बार लड़कियों की भीड़ ने मिका को घेर लिया और दोनों ही बार उन्हें बचाने के लिये शेखर को आगे आना पड़ा।
मिका ने अपने कॅरियर के शुरूआती दिनों को याद करते हुये बताया कि वे स्टेज शोज में म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स बजाया करते थे और इसके बदले में उन्हें प्रति शो 100 रूपये से लेकर 150 रूपये मिला करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन दिनों को कभी भूल नहीं सकता। मुझे जब भी जो अवसर मिला मैंने उसे जाने नहीं दिया, यहां तक कि रामलीला में हरमोनियम भी बजाया। उन दिनों के संघर्ष ने मुझे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिये तैयार कर दिया और यही वजह है कि इस इंडस्ट्री में शुरूआती दिनों के संघर्ष से मैं विचलित नहीं हुआ।‘‘
मिका ने यह स्वीकार कि उसने इस वर्ष अमिताभ बच्चन के लिये गाने का लक्ष्य बना रखा है और भविष्य में आमिर खान के लिये भी वह गाना चाहते हैं। शेखर ने जब उनसे उनके बैड ब्वाय इमेज के विषय में पूछा तो उन्होंने मुस्कुराते हुये कहा, ‘‘मैं नेक दिल वाला बैड ब्वॉय हूं। आप मुझसे प्यार कर सकते हैं, नफरत कर सकते हैं मगर मुझे नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। चाहे आप जिस तरीके से मेरे विषय में सोचें, उतना ही मेरे लिये बहुत है।‘‘ शेखर सुमन ने कहा, ‘‘वह हमेशा ही विवादों में रहने वाले बच्चे हैं मगर यह आश्चर्य की बात है कि हमेशा ही वह उससे बाहर निकलने में सफल हो जाते हैं। उनके विषय में सबसे अच्छी बात यह है कि वह खुलकर, ईमानदारी से और दिल से बोलते हैं। उनके जैसे बहु-मुखी एवं अत्यधिक प्रतिभाशाली कलाकार का इस शो में शामिल होना बहुत बड़ी बात है।‘‘

नारायणी शास्त्री का अनदेखा अवतार



नारायणी शास्त्री टीवी पर लौट आयी हैं और इस मर्तबा इस बार वह ऐसी भूमिका में आयी है जिसके लिए कई एक्टर एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। जी टीवी के आने वाले प्राइमटाइम शो फिर सुबह होगी में वह ऐसे रूप में दिखाई देगी जिसे दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा होगा। इस शो में वह गुलबिया की दमदार भूमिका से वापस लौटी है। यह कहानी मध्य प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र में रहने वाली आदिवासी प्रजाति बेडि़या के बारे में हैं। खुबसूरत राई नर्तकी गुलबिया अपने जमाने में क्षेत्र के ठाकुरों की सबसे ज्यादा पसंदीदा महिला थी। गुलाबिया के रूप में नारायणी को एक ओर सामाजिक मापदंडों मे जकड़ी महिला दिखाया गया है तो दूसरी तरफ वह यह चाहती है कि उसकी बेटी सारी परम्पराओं को तोड़ कर मुक्त हो जाए। नारायणी का मानना है कि वह काफी भाग्यशाली हैं, जो उसे काम्या पंजाबी और अंचित कोर के लिए सोची गई भूमिका के लिए उपयुक्त मानकर यह रोल दिया गया है।
वह कहती हैं, ‘‘जब पहली बार मैंने कहानी सुनी तो पता चला कि इसकी पृष्ठभूमि मे ही इतनी मजबूत पकड़ है कि वह गुलाबिया की भूमिका करने का अवसर पाते ही उछल पड़ी। यह कहानी अपने आप को परखने की स्थिति के बीच उम्मीद खोजने के बारे में है। इसमें परम्पराओं और रूढि़यों के नाम पर महिलाओं के शोषण और उसके द्वारा झेली जाने वाली समस्याओं का खुबसूरती से चित्रण किया गया है। जी टीवी ने इसे और भी खुबसूरत बना दिया है। इससे पहले जी टीवी के लिए पिया का घर और ममता करने के बाद फिर सुबह होगी में काम करना घर लौटने जैसा ही हैं।’’
फिर सुबह होगी मे नारायणी को नायिका की मां गुलबिया की भूमिका में देखा जा सकेगा। वह ऐसी मां है जिसे अपने बेटी के भविष्य की चिंता है। उसे कर्म के कानून पर विश्वास है जिसकी यह धारणा है कि आज की स्थिति के लिए पुराने कर्म ही जिम्मेदार होते है।

जावेद अख़्तर ने कॉपीराइट कानून के मसले पर बोला


यूएफओ 0110 इंटरनेषनल फिल्म फेस्टिवल में आज सुनने से लाचार लोगों (बधिरों) के जीवन परिवेष की गहराइयों में झांकने का प्रयास किया गया और इस माध्यम से यह संदेष दिया गया कि बधिर होना महज विकलांगता नहीं है बल्कि दुनिया को अलग नजरिये से अनुभव करना है।
फेस्टिवल में आज बधिरों की जीवनचर्या के विभिन्न आयामों को फिल्मों की एक श्रृंखला के माध्यम से दिखाया गया। ये फिल्में ब्रिटिष साइन लैंग्वेज़ ब्राडकास्टिंग ट्रस्ट (बीएसएलबीटी) द्वारा प्रस्तुत की गईं। आज प्रदर्षित फिल्मों में षामिल हैं - एडमिट नॉन, फाइव नीडल्स, चेजिंग कॉटन क्लाउड्स, और द एण्ड। बीएसएलबीटी की प्रस्तुतियों के अलावा इसी सिलसिले में उना विदा पलब्रास (ए लाइफ विदाउट वर्ड्स) नामक एक रोचक मूवी भी देखने को मिली।
प्लैगियेरिज़्म के मसले पर यूएफओ 0110 इंटरनेषनल डिजिटल फिल्म फेस्टिवल में आज भारत में कॉपीराइट कानून पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।
नामी गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख़्तर के साथ पारोमिता वोहरा (डाक्युमेंट्री फिल्म निर्माता), अमित दत्ता (अधिवक्ता) और राहुल राम (बास गिटारवादक और गायक, इंडियन ओषन) ने सेमिनार में खुल कर अपनी बात रखी।
गीतकार और कम्पोज़र का पक्ष लेकर इस कानून में बदलाव की वकालत करते जावेद अख़्तर ने कहा, ‘‘गीतकार और कम्पोजर की क्रिएटिवीटी को फिल्म निर्माता नजरअंदाज नहीं कर सकते। दरअसल हम सभी को इस मसले पर ध्यान देना होगा और इस दिशा में काम करना होगा। मेरे लिखे गाने रेडियो और टीवी पर बजते हैं, इंटरनेट से डाउनलोड किए जाते हैं और विदेषों में भी बजाए जाते हैं। इसलिए इनकी रॉयल्टी में लेखकों की हिस्सेदारी होनी चाहिए। भारत में हम ने कभी भी कॉपीराइट को गंभीरता से नहीं लिया है और आज हम इस लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं।’’
‘‘बधिरों में जीवन के प्रति उत्साह और सकारात्मक सोच को प्रदर्षित करने के इस अवसर पर आज हम ने सुनने से लाचार लोगों के एक समूह को विषेश तौर पर आमंत्रित किया। सांकेतिक भाशा और सबटाइटल्स (परदे के सबसे नीचे) की मदद से ये फिल्में खास तौर पर बधिरों के लिए बनी हैं और बधिरों के बारे में हैं। इन प्रयासों के षानदार नतीजे मिले हैं,’’ मधुरीता आनंद कहती हैं जो यूएफओ 0110 आईडीएफएफ की फेस्टिवल डायरेक्टर और खुद एक फिल्म निर्देषिका हैं और एक्का फिल्म्स प्राइवेट लि. की संस्थापिका हैं।
कॉपीराइट के मसले पर मधुरीता आनंद/पारोमिता वोहरा (उसने) कहा, ‘‘तकनीकी के दम पर पायरेसी में वृद्धि की बात जगजाहिर है इसलिए हमें चाहिए कि मसले को गंभीरता से लें। वक्त आ गया है कि नवोदित फिल्मकार इस उद्योग जगत की बारीक से बारीक बातों को समझें। पर अफसोस, कॉपीराइट और प्लैगियेरिज़्म के मामलों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस सेमिनार के पीछे हमारा असली मकसद इस संबंध में जागरूकता लाना है।’’
उना विदा सिन पलाब्रास एक डाक्युमेंट्री है जिसके निर्देषक ऐडम आइज़नबर्ग हैं। फिल्म में दो बधिर हैं - डल्का मारिया और उसका भाई फ्रांसिस्को जो कोई भाशा नहीं जानते हैं - बोलना, लिखना या फिर सांकेतिक भाशा समझना भी उनके वष में नहीं है। ऐडम आइज़नबर्ग के अनुसार, जन्मजात बधिर को यदि सांकेतिक भाशा नहीं सिखाई जाती है तो अपने निजी मामलों में भी वे मूक हो जाते हैं। किसी भाशा के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। यह तो सरासर अन्याय लगता है। इसी सोच के साथ, उना विदा सिन पलाब्रास पहली भाषा सीखने की अहमियत पर केंद्रित मसलों को बखूबी प्रदर्षित करती है।
एडमिट नॉन एक अति यथार्थवादी कॉमेडी है जो बधिरों की रोजमर्रा की जिन्दगी में आने वाली मुसीबतों को दिखाती है। इसका फिल्मांकन ब्रिटिष साइन लैंग्वेज़ में किया गया है जो सम्मोहक है। कहानी दो बधिर सहकर्मियों की है जिनकी सिनेमा हॉल यात्रा की अंतिम परिणति अतियर्थार्थवादी खोज में दिखती है क्योंकि फिल्म से सबटाइटल भी हटा लिए गए हैं। फिल्म की निर्देषिका हैं टेरेसा गैरेटी।
फाइव नीडल्स एक ऐतिहासिक नाटक है जो हमें हिटलर के कंसंट्रेषन कैम्प में ले जाता है। जुलियन पीड्ल कैलो निर्देषित फिल्म पोलैंड के बिरकेनाउ की चार बधिर युवतियों की जिन्दगी पर केंद्रित है। ये महिलाएं सिलाई के काम में जबरन झांकी गई हैं और लंबी, बारीक सुई से ऊन की मोटी परतों और ‘फर’ को सिलने में लगी रहती हैं। एक अन्य फिल्म चेज़िंग कॉटन क्लाउड्स एक लघु फिल्म है। इसमें एक 11 वर्शीय बधिर बालक, माइकेल अपनी कल्पना की दुनिया में रहता है। अपने पिता के खोने का गम, और स्कूल एवं घर पर अलग-थलग होने का दुःख भुलाने के लिए वह जादुई काल्पनिक दुनिया बना लेता है जहां उसे अपने पिता के जीवित होने का अहसास रहता है।
1980 के दषक से षुरू इस ड्रामा, ‘द एण्ड’, में चार बधिर बच्चों पर 60 साल से अधिक समय तक नजर बनी रहती है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक बधिर के इलाज का बधिर समुदाय पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह विचारोत्तेजक फिल्म भविश्य के लिए एक वैकल्पिक नजरिया पेष करती है।
आज प्रदर्षित अन्य फिल्में हैं - सेल्फलेस डिवोषन, कोडा, सड, जस्ट षॉर्ट ऑफ ए डे, न्वॉयट गा लिडा, लाडम, महफूज, यातास्तो, साइलैंट स्नो और मॉरिस।

ताऊ की खरी खरी


“कौन कहां और के बोल्या, सब नेता नगरी हरी भरी,

नही किसी से डरता ताऊ सुन लो इसकी खरी खरी ”

यह कहना है ताऊ का, जो कि आम आदमी की समस्याओं को उठाते हैं अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ताऊ की खरी खरी में. सहारा समय पर रविवार दोपहर 1 बजे और शाम 6 बजे दिखाया जाने वाले इस कार्यक्रम में ताऊ हिन्दी और हरियाणवी भाषा में अपने दर्शकों से रूबरू होते हैं. विषय कुछ भी हो, समस्या कैसी भी हो, आम आदमी से जुड़े सरोकारों को लेकर ताऊ देश के नेताओं और समस्या के लिए जिम्मेदार लोगों की अपने चुटीले अंदाज़ में क्लास लेते हैं. बहुत ही कम समय में यह कार्यक्रम दर्शकों में इसलिए लोकप्रिय हुआ है क्योंकि इसका प्रस्तुतिकरण बहुत ही अनोखा है.

किसी भी अन्य कार्यक्रम की तरह ताऊ इसमें कुर्सी पर नही बल्कि खाट पर बैठते हैं सभी प्रसिद्ध लोग ताऊ के साथ उनकी खाट पर ही बैठतें हैं और देश के हालात पर अपने विचार रखते हैं. ताऊ के साथ उनकी खाट पर कैलाश खेर, मास्टर सलीम, तिग्मांशू धूलिया और इरफान खान जैसे प्रसिद्ध लोग अब तक बैठ चुके हैं. ताऊ सभी मेहमानों को देश - समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करते हैं और ये मेहमान अपने माध्यम से लोगों को जागरूक करते हैं. ताऊ केवल राजनीतिक चर्चा ही नही करते बल्कि अच्छे सिनेमा, नाटक के बारे में भी चर्चा करते हैं.

इस कार्यक्रम में जहां ताऊ लोगों की समस्याओं को उठाते है वहीं आम आदमी की आवाज़ भी बनते हैं. आम आदमी को उसके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं साथ ही आम आदमी को भी इस कार्यक्रम में अपनी बात कहने का मंच दिया जाता है. उसकी राय रिपोर्टरों के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल की जाती है.

समय चैनल के अलावा ये कार्यक्रम रविवार रात 9.30 बजे सहारा उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, सहारा बिहार झारखंड रविवार रात 10.30 पर भी दिखाया जाता है. इस कार्यक्रम का निर्माण सहारा की क्रिएटिव टीम करती है. जिसमें अनु रिज़वी, अनुराग दीक्षित, विजय कुमार के साथ ताऊ ( अतुल गंगवार ) हैं

मंगलवार, 13 मार्च 2012

गुरमीत और कृतिका का रोमांटिक मड बाथ






यह सब पुनर्विवाह के प्रोमो के साथ आरंभ हुआ जब एक्ट्रेस कृतिका सेंगर गुरमीत चौधरी जो चिटकनी खोलते समय उसके जरूरत से ज्यादा नजदीक हो गया था, के साथ बाथरूम में बंद दिखाया गया था और यह प्रोमो इंस्टेंट हिट हो गया ......इसलिए जब जी टीवी के प्राइमटाइम शो हिटलर दीदी के होली स्पेशल एपिसोड में पुनर्विवाह की आकर्षक जोड़ी के लिए स्पेशल डांस सिक्वेंस प्लान किया जा रहा था, तब निर्देशक का यह विजन था कि दोनों को मड में डांस करते हुए होली मनाते हुए दिखाकर गुरमीत और कृतिका के बीच फैंटास्टिक कैमिस्ट्री को और आगे खोजा जाए।

फिर भी यह देखना बहुत ही दिलचस्प था कि आमतौर पर स्पोर्टिंग गुरमीत जो बिना किसी हंगामे के अपना शर्ट उतार देता है उसने पूरी तरह से शर्ट उतारने से इंकार कर दिया। आप पूछेंगे कि आखिर क्या वजह थी कि वह इतनी मेहनत से बनाए अपने सिक्स पैक को पूरी तरह से शर्ट उतार कर दिखाने से इतना कतरा रहा था? सूत्रों से पता चला है कि गुरमीत ने बाथरूम प्रोमो के बाद से ही उसके और कृतिका के बीच हॉट केमिस्ट्री को लेकर काफी कुछ सुन रखा था और वह नहीं चाहता था कि यह चिंगारी आग बनकर भडक़ उठे। अपनी पत्नी देबिना के प्यार मे पागल और उसकी भावनाओं के प्रति संवेदनशील गुरमीत नहीं चाहते कि देबिना उसे देख एक पल भी असहज हो जाए! वाह क्या बात है? फिर भी उसने भले ही शर्ट न उतारा हो लेकिन मड में डांस का यह दृश्य बहुत ही रोमांटिक बना। इसमें एक्टर्स की त्वचा का ध्यान रखते हुए क्रिएटिव ने केवल मुलतानी मिट्टी का उपयोग किया गया. कृतिका और गुरमीत ने अक्षय कुमार और रेखा की फिल्म खतरों के खिलाड़ी का सैक्सी गीत बेहद सैक्सी अंदाज में मड में लथपथ होकर पेश किया गया.

जय सोनी पर समलैंगिक की नज़ऱ


ये हम क्या सुन रहे हैं ? ससुराल गेंदा फूल का हमारा ईशान दिल्ली में एक समलैंगिक (गे) से टकरा गया। घरेलू लड़के जैसे दिखने वाले युवा और सुंदर अभिनेता जय सोनी के पूरे देश में प्रशंसक हैं लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उनके प्रशंसकों की लिस्ट में लड़के भी हैं। यह घटना तब हुयी जब यह अभिनेता आने वाले स्टार परिवार अवार्ड्स के प्रमोशनल समारोह के लिये राजधानी गया था। जय का समलैंगिक प्रशंसक जय की एक बड़ी सी तस्वीर लेकर आया था जिस पर उसने जय से ऑटोग्राफ देने की जिद की और तब तक वहां रुका रहा जब तक जय वहां रहे। वह जितनी देर वहां रहा, जय के साथ अपनी तस्वीरें खींचता रहा। उसने जय के साथ करीब 100 तस्वीरें खिंचवायीं। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुये जय ने कहा, ‘‘मैं ठीक से नहीं बता सकता कि क्या हुआ था, मैं जहां भी गया वहां मैंने उसे देखा, यहां तक कि अपनी वैनिटी वैन के बाहर भी। हालांकि शुरू में मैं थोड़ा शॉक्ड था लेकिन बाद में मुझे अच्छा लगा कि मैं लड़कों के बीच भी लोकप्रिय हूं।’’ अभिनेता ने अपनी सह-कलाकार ससुराल गेंदा फूल की सुहाना (रागिनी खन्ना) के साथ अपने प्रशंसकों के साथ खूब मस्ती की और शहर के कुछ स्थानीय ज़ायकों का मज़ा भी लिया।

छोटे परदे पर फिर के के रैना


अभिनेता के के रैना ने करीब २२ साल पहले दूरदर्शन पर लोकप्रिय जासूसी सीरीज व्योमकेश बक्षी में अभिनय किया था अब एक बार फिर से के के रैना ११ मार्च से हर रविवार सुबह १० बजे से प्रसारित हो रहे चिन्मय मिशन के धारावाहिक ‘उपनिषद गंगा’ में दिखाई दे रहे हैं .चाणक्य फेम डॉ चंद्रप्रकाश दिव्वेदी द्वारा निर्देशित इस सीरियल में के के रैना ने चाणक्य, हरिदास, नारद व याज्ञवल्क्य के चरित्रों को निभाया है. टी वी धारावाहिकों के साथ-साथ रैना ने फिल्मों में भी अभिनय किया है जैसे तनु वेड्स मनु, रंग दे बसंती, दिल्ली -६, हाइजैक, फूंक, लक्ष्य, सलाम ए ईश्क और गाँधी. के के रैना अभिनय के साथ संवाद लेखन भी करते हैं.उनसे बातचीत -


· आपने कौन - कौन सी भूमिकाएं अभिनीत की है धारावाहिक “उपनिषद गंगा” में और कितना मुश्किल रहा इन्हें अभिनीत करना?

मैंने हरिदास, नारद, याज्ञवल्क्य और चाणक्य के चरित्रों को अभिनीत किया है मुश्किल तो नही रहा करना लेकिन मज़ा बहुत आया इन सभी चरित्रों को अभिनीत करने में. ‘चाणक्य’ को करना चुनौतीपूर्णजरुर रहा क्योंकि चाणक्य को पहले डॉ साहब ने खुद किया था. इसके अलावा एक उत्तर भारतीय संत के चरित्र को अभिनित करना भी बहुत ही यादगार रहा, जो कि दक्षिण में जाता है लेकिन उसे वहाँ की भाषा नही आती उसे बस एक शब्द ‘पर्विल्ला’ आता है जब कोई उससे कुछ भी पूछता है उसका जवाब होता है ‘पर्विल्ला’ मतलब सब ठीक है. इस चरित्र को मैंने शारीरिक हाव भाव के माध्यम से अभिनीत किया है.


· जब आपने टी वी पर काम करना छोड़ ही दिया था तब क्या वजह रही चिन्मय मिशन के ‘उपनिषद गंगा’ में काम करने की ?

मैंने टी वी पर आखिरी काम किया था ‘व्योमकेश बक्षी’ में. मुझे डॉ साहब ने बुलाया और कहा कि मैं ‘उपनिषद गंगा’ करना चाहता हूँ और चाहता हूँ कि आप भी इसमें काम करें मैंने कहा कि मैं तो टी वी अब करता नही उन्होंने मुझे ४ स्किप्ट दी और कहा कि पढ़ो अच्छा लगे तो करना. मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी मुझे बहुत ही अच्छी लगी, जिस तरह से डॉ साहब थियेटर और सिनेमा दोनों को एक साथ लेकर काम करना चाहते थे वो बहुत ही काबिलेतारीफ था. इसके अलावा मैंने सोचा कि इसमें काम करके मैं भी कुछ जान व समझ सकता हूँ कि क्या हमारे ऋषि मुनियों ने इसमें कहा है. हम सब कहते हैं कि वेदों में उपनिषदों में यह कहा गया वो कहा गया है जबकि हममें से अधिकतर को नही पता कि सच में क्या कहा गया है.


क्या युवाओं को पसंद आयेगा ‘उपनिषद गंगा’ ?

हाँ जरुर क्योंकि उपनिषद में भी वो ही सब लिखा गया है जो कि आज के समाज की समस्या है जैसे शिक्षा का अधिकार सभी को है ऐसे ही पुराने समय में णक्य ने भी यही कहा कि शिक्षा सभी के लिए जरुरी है. जबकि लोग कहते हैं कि ब्राह्मणों ने शिक्षा को केवल अपने तक ही सीमित रखा था. किसी भी दूसरी जाति को शिक्षा हासिल नही करने देते थे. इसके अलावा अपने अतीत को भी हम ‘उपनिषद गंगा’ के माध्यम से जान सकते हैं. किसी लेखक ने भी कहा है कि “जब तक हम अपने अतीत को नही जानते तो जिंदगी भर आप एक बच्चा ही बने रहते हैं”. युवाओं को पता चलेगा कि आखिर उपनिषद में ऐसा क्या है जिसके बारे में हम सभी बातें करते है.


· आपने ‘चाणक्य’ के चरित्र को अभिनीत किया है तो क्या किसी तरह का कोई दवाब रहा आप पर क्योंकि डॉ साहब ने भी इसे अभिनीत किया था और वही इसे निर्देशित कर रहे थे ?

शुरू में तो कुछ दवाब होता है ही लेकिन जब आपके पास स्क्रिप्ट आ जाती है तब आपको अपने ही हिसाब से अभिनय करना होता है मैं तो वैसे भी सब कुछ भूल जाता हूँ कि पहले किस कलाकार ने इसे अभिनीत किया था मैं थियेटर से हूँ तो मुझे इसकी आदत है और डॉ साहब ने तो पूरे सीरियल में ही चाणक्य का चरित्र अभिनीत किया था जबकि मैंने तो बस एक ही एपिसोड में इसे अभिनीत किया है. मैंने डॉ साहब से बिल्कुल अलग ही तरह से इसे पेश किया है जब आप देखेगें तब आपको पता चलेगा.


· आप किसी भी चरित्र को अभिनीत करने से पहले कैसे उसकी तैयारी करते हैं ?

मुझे ३० साल हो गए मुझे अभिनय करते हुए अब तो इस सबकी आदत हो गयी है. लेकिन आज भी किसी भी चरित्र को अभिनीत करने से पहले मुझे निर्देशक से, लेखक व कास्ट्यूम डिजायनर से बात करनी पड़ती है व उस समय में पहुंचना होता है जिस समय की कहानी निर्देशक दिखाना चाहता है.


· ‘उपनिषद गंगा’ के अलावा क्या कर रहे हैं ?

एक कश्मीरी फिल्म कर रहा हूँ इसके अलावा एक नाटक भी कर रहा हूँ जिसका नाम नमस्ते है.

ट्विटर ने पायल को मुसीबत में डाला !!!


पायल रोहतगी विवाद खड़े करना जानती हैं और इस बार उन्होंने स्टार प्लस के रियालिटी शो सर्वाइवर इंडिया की अपनी सह-प्रतिभागी मुनीषा खटवानी के खिलाफ मोर्चा खोला है। पायल ने टैरो कार्ड रीडर मुनीषा के खिलाफ उनके ट्विटर अकाउंट पर बहुत आक्रामक टिप्पणी की है।
मुनीषा ने बदले में पायल के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी है। उन्होंने टिप्पणी भी की, ‘‘पायल पागल हो गयी है। मुझे समझ में नहीं आता कि कोई अभद्रता के इस स्तर तक कैसे गिर सकता है। वह अपना कैरियर जीरो होने की वजह से निराश हो गयी है। मुझे लगता है कि सबको पता है कि पायल अपने जीने के लिये कौन सा काम करती है।’’ हालांकि, बाद में पायल का मन बदल गया और उसने मुनीषा के ट्विटर पेज पर जाकर माफी मांगी। शो का ग्राण्ड फिनाले इस शनिवार रात 9 बजे होगा जहां जेडी, स्टिथ और राजरानी में से किसी एक को पहले सर्वाइवर इंडिया का ताज पहनाया जायेगा। तो इस गलाकाट खेल में कौन विजेता साबित होगा ?

देखिये सर्वाइवर इंडिया का ग्रैंड फिनाले इस शनिवार 17 मार्च 2012 को रात 9 बजे सिर्फ स्टार प्लस पर

शाहरुख खान की दीवानी नेहा कक्कड


लोग कहते हैं कि अभिनेता शाहरुख खान अब बूड़े हो गए हैं जबकि ऐसा नही है वो आज भी जवां लड़कियों के दिलों की धडकन हैं और यह बात साबित कर दी है गायिका नेहा कक्कड़ ने अपने गीत ‘शाहरुख खान’ को गाकर, टोनी कक्कड़ द्वारा लिखित व संगीतबद्ध किये गए इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार ही दिन में यू ट्यूब में इसे १ लाख ६० हज़ार दर्शकों ने देखा.

नेहा की बहुत ही सेक्सी आवाज में गाये इस गीत को सुनकर शाहरुख खान भी शरमा गये और उन्होंने ट्वीट भी किया कि “नेहा की आवाज बहुत ही प्यारी है और उसने बहुत ही मीठी आवाज में गीत को गाया है”. शाहरुख खान के प्रशंसकों ने तो इस गीत को “शाहरुख खान ऐन्थेम” का नाम भी दे दिया है. यह गाना इतना लोकप्रिय हो गया है कि श्रोता इसे अलग -- अलग भाषाओ में भी सुनना चाहते हैं. तो हो सकता है कि जल्दी ही नेहा कक्कड़ की मधुर आवाज में उन्हें अलग - अलग भाषाओ में यह गीत सुनने को मिलें.

नेहा से पूछने पर कि क्या उनको पता था कि उनका गाया यह गीत इतना हिट होगा ? उन्होंने कहा, ‘नही, बिलकुल नही मैं तो शाहरुख खान की दीवानी हूँ मेरे प्रिय अभिनेता हैं शाहरुख, तो मैंने सोचा कि क्यों न कुछ उनके लिए भी गाऊं. मैंने अपने भाई टोनी से इस बारे में बात की. उन्होंने इस गीत के बोल लिखे और संगीत भी तैयार किया है. मैं बहुत ही खुश हूँ कि शाहरुख ने मेरे गाने को नोटिस किया.”