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मंगलवार, 13 मार्च 2012

छोटे परदे पर फिर के के रैना


अभिनेता के के रैना ने करीब २२ साल पहले दूरदर्शन पर लोकप्रिय जासूसी सीरीज व्योमकेश बक्षी में अभिनय किया था अब एक बार फिर से के के रैना ११ मार्च से हर रविवार सुबह १० बजे से प्रसारित हो रहे चिन्मय मिशन के धारावाहिक ‘उपनिषद गंगा’ में दिखाई दे रहे हैं .चाणक्य फेम डॉ चंद्रप्रकाश दिव्वेदी द्वारा निर्देशित इस सीरियल में के के रैना ने चाणक्य, हरिदास, नारद व याज्ञवल्क्य के चरित्रों को निभाया है. टी वी धारावाहिकों के साथ-साथ रैना ने फिल्मों में भी अभिनय किया है जैसे तनु वेड्स मनु, रंग दे बसंती, दिल्ली -६, हाइजैक, फूंक, लक्ष्य, सलाम ए ईश्क और गाँधी. के के रैना अभिनय के साथ संवाद लेखन भी करते हैं.उनसे बातचीत -


· आपने कौन - कौन सी भूमिकाएं अभिनीत की है धारावाहिक “उपनिषद गंगा” में और कितना मुश्किल रहा इन्हें अभिनीत करना?

मैंने हरिदास, नारद, याज्ञवल्क्य और चाणक्य के चरित्रों को अभिनीत किया है मुश्किल तो नही रहा करना लेकिन मज़ा बहुत आया इन सभी चरित्रों को अभिनीत करने में. ‘चाणक्य’ को करना चुनौतीपूर्णजरुर रहा क्योंकि चाणक्य को पहले डॉ साहब ने खुद किया था. इसके अलावा एक उत्तर भारतीय संत के चरित्र को अभिनित करना भी बहुत ही यादगार रहा, जो कि दक्षिण में जाता है लेकिन उसे वहाँ की भाषा नही आती उसे बस एक शब्द ‘पर्विल्ला’ आता है जब कोई उससे कुछ भी पूछता है उसका जवाब होता है ‘पर्विल्ला’ मतलब सब ठीक है. इस चरित्र को मैंने शारीरिक हाव भाव के माध्यम से अभिनीत किया है.


· जब आपने टी वी पर काम करना छोड़ ही दिया था तब क्या वजह रही चिन्मय मिशन के ‘उपनिषद गंगा’ में काम करने की ?

मैंने टी वी पर आखिरी काम किया था ‘व्योमकेश बक्षी’ में. मुझे डॉ साहब ने बुलाया और कहा कि मैं ‘उपनिषद गंगा’ करना चाहता हूँ और चाहता हूँ कि आप भी इसमें काम करें मैंने कहा कि मैं तो टी वी अब करता नही उन्होंने मुझे ४ स्किप्ट दी और कहा कि पढ़ो अच्छा लगे तो करना. मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी मुझे बहुत ही अच्छी लगी, जिस तरह से डॉ साहब थियेटर और सिनेमा दोनों को एक साथ लेकर काम करना चाहते थे वो बहुत ही काबिलेतारीफ था. इसके अलावा मैंने सोचा कि इसमें काम करके मैं भी कुछ जान व समझ सकता हूँ कि क्या हमारे ऋषि मुनियों ने इसमें कहा है. हम सब कहते हैं कि वेदों में उपनिषदों में यह कहा गया वो कहा गया है जबकि हममें से अधिकतर को नही पता कि सच में क्या कहा गया है.


क्या युवाओं को पसंद आयेगा ‘उपनिषद गंगा’ ?

हाँ जरुर क्योंकि उपनिषद में भी वो ही सब लिखा गया है जो कि आज के समाज की समस्या है जैसे शिक्षा का अधिकार सभी को है ऐसे ही पुराने समय में णक्य ने भी यही कहा कि शिक्षा सभी के लिए जरुरी है. जबकि लोग कहते हैं कि ब्राह्मणों ने शिक्षा को केवल अपने तक ही सीमित रखा था. किसी भी दूसरी जाति को शिक्षा हासिल नही करने देते थे. इसके अलावा अपने अतीत को भी हम ‘उपनिषद गंगा’ के माध्यम से जान सकते हैं. किसी लेखक ने भी कहा है कि “जब तक हम अपने अतीत को नही जानते तो जिंदगी भर आप एक बच्चा ही बने रहते हैं”. युवाओं को पता चलेगा कि आखिर उपनिषद में ऐसा क्या है जिसके बारे में हम सभी बातें करते है.


· आपने ‘चाणक्य’ के चरित्र को अभिनीत किया है तो क्या किसी तरह का कोई दवाब रहा आप पर क्योंकि डॉ साहब ने भी इसे अभिनीत किया था और वही इसे निर्देशित कर रहे थे ?

शुरू में तो कुछ दवाब होता है ही लेकिन जब आपके पास स्क्रिप्ट आ जाती है तब आपको अपने ही हिसाब से अभिनय करना होता है मैं तो वैसे भी सब कुछ भूल जाता हूँ कि पहले किस कलाकार ने इसे अभिनीत किया था मैं थियेटर से हूँ तो मुझे इसकी आदत है और डॉ साहब ने तो पूरे सीरियल में ही चाणक्य का चरित्र अभिनीत किया था जबकि मैंने तो बस एक ही एपिसोड में इसे अभिनीत किया है. मैंने डॉ साहब से बिल्कुल अलग ही तरह से इसे पेश किया है जब आप देखेगें तब आपको पता चलेगा.


· आप किसी भी चरित्र को अभिनीत करने से पहले कैसे उसकी तैयारी करते हैं ?

मुझे ३० साल हो गए मुझे अभिनय करते हुए अब तो इस सबकी आदत हो गयी है. लेकिन आज भी किसी भी चरित्र को अभिनीत करने से पहले मुझे निर्देशक से, लेखक व कास्ट्यूम डिजायनर से बात करनी पड़ती है व उस समय में पहुंचना होता है जिस समय की कहानी निर्देशक दिखाना चाहता है.


· ‘उपनिषद गंगा’ के अलावा क्या कर रहे हैं ?

एक कश्मीरी फिल्म कर रहा हूँ इसके अलावा एक नाटक भी कर रहा हूँ जिसका नाम नमस्ते है.

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

दिक्कत में शाहरुख



नई फिल्म और नये लुक के साथ शाहरुख खान दर्शकों के सामने हैं। फिल्म "रा.वन' के म्यूजिक लॉन्च के अवसर पर शाहरुख ने फिल्म और अपने बेटे से जुड़ी बातें करके सबको लोट-पोट कर दिया। अपनी सबसे महंगी फिल्म को लेकर शाहरुख कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड शाहरुख से बातचीत-

फिल्म "रा.वन' करने का कोई खास मकसद?
मैं पिछले 20 सालों से काम कर रहा हूं। मेरे बच्चे सोचते थे कि मैं सिर्फ नाच-गा सकता हूं, माचो टाइप के रोल्स नहीं कर सकता हूं इसलिए मेरे लिए जरूरी हो गया था कि मैं उन्हें दिखाऊं कि मैं भी माचो मैन बन सकता हूं (हंसते हुए)। वैसे आपको बता दूं कि हमारे यहां सुपर हीरो का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। मैं अपने देश के लिए अपना सुपर हीरो इंट्रोडउस करना चाहता था।

फिल्म में आपके चरित्र के दो नाम हैं, दोनों में क्या समानता है?
एक का नाम जीवन है तो दूसरे का शेखर। शेखर अपनी पत्नी और बेटे से बहुत प्यार करता है। हर समय उसे प्रपोज करता रहता है। दूसरी ओर, जीवन भी उससे बहुत प्यार करता है। यह फिल्म न सिर्फ एक्शन के बारे में है बल्कि इसमें रोमांस और बाप-बेटे की प्यारी सी कहानी भी है।

बाप-बेटे का रिश्ता दिखाने की कोई खास वजह?
हर बेटा अपनी मां के नजदीक होता है। मेरे पिता नहीं हैं। मैं खुद अपनी मां के नजदीक हूं। मेरा बेटा भी सोचता है कि मैं कूल नहीं हूं। मैं ऐसी फिल्म बनाना चाहता था। मुझे उम्मीद है कि इस फिल्म के बाद बाप और बेटे भी एक-दूसरे से ज्यादा प्यार करेंगे।

इस फिल्म में आपने जो कॉस्टउम पहना है, वह काफी भारी दिखता है?
बस दिखता ही है, असल में काफी पतले फैब्रिक का बना है। बस दिक्कत यही है कि उसे पहनने के बाद मुझे हाथ-पैर स्ट्रेच करने में दिक्कत होती थी। और, उससे भी बड़ी दिक्कत यह कि उसमें गर्मी बहुत लगती थी।

करीना के साथ कम फिल्में करने की क्या वजह है?
करीना बहुत व्यस्त रहती हैं। उनके पास समय की कमी है। बड़ी मुश्किल से उन्होंने इस फिल्म के लिए अलग से समय निकाला। उनके पास डेट्स लेने जाओ तो दो-ढाई साल बाद की डेट्स मिलती है।

एकॉन से गाना गवाने की प्रेरणा कहां से मिली?
इसका पूरा श्रेय विशाल-शेखर को जाता है। वह देरी से काम करते हैं पर जबरदस्त करते हैं। मुझे याद है जब मेरा बेटा 5-6 साल का था तो हम दोनों कार में एकॉन का गाना सुनते थे। जब इस गाने को गवाने की बारी आई तो दिमाग में एकॉन का ही नाम आया।

इस फिल्म के बाद क्या?
पहले तो यह फिल्म रिलीज हो जाए। वैसे इसके बाद मैं फिर से रोमांटिक फिल्मों की ओर लौटूंगा।

क्या यह सच है कि यह फिल्म अन्य भाषाओं में भी रिलीज होगी?
बिल्कुल सच है। तमिल और तेलुगु में तो डब हो रही है। मैं तो चाहता हूं कि जर्मन के अलावा अन्य विदेशी भाषाओं में भी डब हो जाए।

बुधवार, 13 जुलाई 2011

किसिंग एक्सपर्ट : अरुणोदय सिंह


"ये साली जिंदगी' में बेहतरीन एक्टिंग और किसिंग सीन दे-देकर अरुणोदय सिंह ने अपना नाम और काम दोनों दर्ज करा लिया। इस फिल्म के अलावा अरुणोदय "मिर्च' और "सिकंदर' में भी अपनी एक्टिंग से प्रभावित कर चुके हैं। उन्हें ऐश्वर्या राय के साथ मधुर भंडारकर की फिल्म "हीरोइन' के लिए भी साइन किया गया था, जो अब नहीं बन रही है। इस फिल्म के बंद हो जाने से अरुणोदय के करियर को नकुसान तो हुआ है लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। पिछले दिनों फिल्म "एक बुरा आदमी' की शूटिंग के बिजी अरुणोदय से बातचीत-


"एक बुरा आदमी' को साइन करने की क्या वजह रही?
इशराक शाह निर्देशित यह फिल्म पॉलिटिकल थ्रिलर पर आधारित है। मेरे किरदार का नाम मुन्ना सिद्दिकी है, जो अच्छे परिवार का नालायक बेटा है। वह पॉलिटिकल पावर को हासिल करना चाहता है। इस फिल्म में रघुवीर यादव, यशपाल शर्मा, किट्टु गिडवानी जैसे मंझे हुए एक्टर्स हैं। मेरे अपोजिट नई एक्ट्रेस अंगीरा हैं।


क्या वजह है कि आप एक के बाद एक निगेटिव रोल्स करते जा रहे हैं?
इसमें मेरा रोल निगेटिव नहीं है। फिल्म की थीम यह है कि हर व्यक्ति के अंदर बुरा इंसान छिपा रहता है। देखिए, मुझे फर्क नहीं पड़ता कि रोल पॉजिटिव है या निगेटिव, बस उसे दमदार होना चाहिए।


क्या रोमांटिक और नाचने-गाने वाली फिल्में पसंद नहीं आतीं?
कई लोग वैसी फिल्में करते हैं। मैं करूं या ना करूं, क्या फर्क पड़ता है। वैसे मैंने अपने लिए कोई लिमिट नहीं तय की है। बस जिस तरह की फिल्में मिल रही हैं, उनमें से जो मुझे अपील करती हैं, कर लेता हूं। यह भी कि जो रोल मुझे मिल रहे हैं, उन्हें मैं अच्छे से कर पाता हूं, ऐसा मुझे लगता है।


ऐसा तो नहीं कि आप इमरान हाशमी का रिकॉर्ड ब्रोक करने की कोशिश में लगे हैं?
बिल्कुल नहीं। मेरा नाम अरुणोदय सिंह है, इमरान हाशमी नहीं। दूसरी बात यह कि आज किस फिल्म में किसिंग सीन नहीं होते हैं। मुझे किसिंग सीन करने में कोई दिक्कत नहीं है, यह भी मेरे काम का हिस्सा ही तो है।


किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले किन बातों पर ध्यान देते हैं?
सबसे पहले तो फिल्म की कहानी पर नजर डालता हूं। यदि कहानी जबरदस्त हो तो फिल्म के चलने के चांसेज रहते हैं। इस फिल्म की कहानी भी काफी अच्छी है, इसलिए जब इशराक ने मुझे इसकी कहानी सुनाई तो मैंने तुरंत हां कर दिया। आपको बता दूं कि इशराक गुलजार साहब के सहायक रह चुके हैं तो उन पर मेरा कुछ ज्यादा ही यकीन है।


"एक बुरा आदमी' के अलावा और किन फिल्मों में काम कर रहे हैं?
"बुद्ध इन ट्रैफिक जाम' विवेक अग्निहोत्री की फिल्म है, जो इस समय मेरे पास है। इसमें अनुपम खेर के अलावा माही गिल है।

गुरुवार, 2 जून 2011

न माने तो छोड़ दो : सलमान खान



इन दिनों सलमान खान रेडी हैं। बीइंग ह्यूमन के पायरेटेड मर्चेंडाइज को लेकर परेशान सलमान खुद के केरेक्टर को ढीला कहकर धिन चक भी कह रहे हैं। रेडी सलमान से बातचीत-



"दबंग' सुपरहिट हुई। अब आप "रेडी' के साथ रेडी हैं। कितने नर्वस हैं?

"रेडी' एक और कॉमेडी फिल्म है। इतने सालों फिल्म इंडस्ट्री में रहने के बाद भी जब भी फिल्म के रिलीज का समय आता है तो मैं यह सोचकर थोड़ा नर्वस हो जाता हूं कि दर्शक पसंद करेंगे या नहीं। किसी भी दूसरे दर्शक की तरह मैं भी फिल्मों से अपेक्षा तो रखता ही हूं। एक साल में सिर्फ सलमान की नहीं, बल्कि कइयों की फिल्म रहती है। आमिर, अक्षय भी अपनी फिल्में रिलीज करते हैं तो बस इतना देखना होता है कि आपकी फिल्म चले और अपनी कीमत वसूल ले।

"वांटेड' के बाद "दबंग' और अब "रेडी', आप सिर्फ एक्शन हीरो ओरियंटेड फिल्में ही क्यों कर रहे हैं?

मैं मानता हूं कि पिछले कुछ सालों से हमारी फिल्मों से हीरोइज्म गायब होती जा रही है। जिस तरह की फिल्में देखकर हम बड़े हुए हैं, उनमें एक्शन हीरो थे, उन्हें हम आज तक नहीं भूल पाए हैं। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों नहीं उस ट्रेंड को वापस लाया जाए और एक्शन हीरो वाली फिल्में की जाएं। जब एक आम व्यक्ति फिल्में देखता है तो लड़ाई में खुद से बेहतर किसी को देखना चाहता है। मैं उसी हीरोइज्म को फिल्मों में लाने की कोशिश में लगा हूं।

"दबंग' को करते समय उस समय लगा था कि फिल्म इतनी बड़ी हिट होगी?

लोग कई तरह की बातें करते हैं। कुछ ने तो टाइटल पर ही सवाल उठा दिए थे। कुछ ने तो यहां तक कह दिया था कि अधिकतर लोग फिल्म को समझेंगे ही नहीं क्योंकि यह टिपिकल यूपी-बिहार वाली फिल्म है। कुछ ने तो यहां तक कह डाला कि यह फिल्म मेरे करियर को पूरी तरह से चौपट कर देगी। लेकिन जब मार्केट में पहला प्रोमो आया और हमें जबरदस्त रिस्पांस मिला तो हम जान गए कि हमें सब कुछ मिल गया है। बाद में जब फिल्म रिलीज हुई तो लोग अपने लोगों को फिल्म देखने के लिए प्रेशर तक डालने लगे।

क्या "रेडी' को "दबंग' का एक्सटेंशन माना जाए?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। "दबंग 2' अभी स्क्रिप्टिंग स्टेज पर है और उसकी शूटिंग मैं "एक था शेरखान' के बाद करूंगा। "रेडी' बिल्कुल अलग फिल्म है। यह कॉमिक एक्शन है, इसके कास्ट भी इंटरेस्टिंग हैं। इसमें कई ट्विस्ट एंड टर्न हैं। मुझे उम्मीद है कि लोग इसे देखकर हंसते रह जाएंगे।

"रेडी' दक्षिण भारतीय फिल्म की रीमेक है। आपकी ज्यादातार फिल्में ऐसी होती हैं तो क्या आप मसालेदार फिल्मों की ओर जा रहे हैं?

फिल्मों से हीरोगिरी नदारद हो गयी है। मैं अपने आप में हंसते या रोते हुए एक हीरो को देखना चाहता था और मुझे विश्वास है कि दूसरे लोग भी ऐसा ही चाहते हैं। कोई ऐसा नहीं करता था तो मैंने ही कर दिया। (हंसते हुए) अक्षय और अजय भी रीमेक करते हैं इसलिए मुझे विश्वास है कि यह काम करेगा। बेहतर तकनीक और सरल भाषा से हमारा प्रदर्शन अब और भी अच्छा हो गया है।

इसका संगीत बहुत पसंद किया जा रहा है, खासतौर पर "कैरेक्टर ढीला है', क्या यह आपका आइडिया था?

लोग कहते रहते हैं कि उसका "कैरेक्टर ढीला है' लेकिन सकारात्मक रूप में इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसलिए हमने सोचा कि अगर हम इस पंच को अच्छे तरह से पेश कर सकें तो शायद यह काम कर जाए।

असिन और आपकी साथ में यह दूसरी फिल्म है, तो अब तक आपकी केमिस्ट्री कैसी रही?

(ठहाका लगाते हुए) अभी तक हमारी केमिस्ट्री बहुत अच्छी रही है और हम आपस में सब कुछ जैसे- कपड़े भी बांटते हैं, सिवाय उनके जिनके साथ हम डेट कर रहे हैं। वैसे आसिन बहुत अच्छी लड़की है। वह अच्छी तरह से जानती है कि क्या कहना चाहिए और क्या नहीं।

यानी कि आसिन स्पष्टवादी नहीं है?

ऐसा नहीं है। वह स्पष्टवादी है और मेरा मानना है कि औरतों को स्पष्टवादी ही होना चाहिए। आपको अपने विचार रखने चाहिए जो वह करती है। अगर उसे कुछ पसंद नहीं आता है तो वह कह देगी कि उसको पसंद नहीं है। अपनी पसंद बताने में उसे डर नहीं लगता है। वह बहुत मेहनती है। (हंसते हुए) वह ऐसे काम करती है जैसे पिछले 35-40 सालों से काम कर रही है और आज तक उसका जोश खत्म नहीं हुआ है। वह अच्छी फिल्में करना चाहती है।

23 साल पहले "मैंने प्यार किया' के समय आप दूसरो को पंच मारा करते थे, आज भी मारते हैं। अपनी हीरोइज्म को किस तरह आपने बरकरार रखा?

अब मैं 23 गुणा ज्यादा अनुशासन में रहता हूं। अब इसे करना 23 गुणा अधिक कठिन है। कई बार आपकी बॉडी रेशनल हो जाती है और आपको एक्शन फिल्में करते समय उसका अधिक ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन यही हमारा काम है।

"बीइंग ह्यूमन' का मिशन क्या है? सुनने में आया है कि आप पायरेटेड बीइंग ह्यूमन मर्चेंडाइज को लेकर परेशान हैं?

परेशान होना तो स्वाभाविक ही है। पता नहीं क्यों कुछ लोग इस तरह का काम कर रहे हैं। मैं मानवता के लिए कुछ करना चाहता हूं और मर्चेंडाइज की बिक्री से जमा रुपये चैरिटी में जाते हैं। लेकिन डुप्लीकेट मर्चेंडाइज समाज की ओर हमारे सहयोग के लिए बाधा है।

हमने राहुल गांधी के साथ आपकी नई दोस्ती के बारे में सुना है। यदि किसी तरह का राजनीतिक या गैर राजनीतिक सहयोग करना पड़ा तो क्या आप आगे बढ़ेंगे?

राहुल बेहतरीन इंसान हैं। देखिए, मैं राजनीति को समझने की कोशिश नहीं कर रहा। मैं बस इंसान हूं। सिर्फ इसी का ख्याल रख पाया तो बड़ी बात है। राहुल भी यही काम कर रहे हैं लेकिन बड़े प्लेटफॉर्म पर।

शादी की अफवाहों पर कैसे प्रतिवाद करते हैं, जैसा कि हाल ही में कहा कि आप शादी नहीं कर रहे हैं?

हां, मैं अभी कुछ समय तक शादी नहीं कर रहा हूं। मैं भी चाहता हूँ कि मेरा भी एक बच्चा हो लेकिन मेरी पसंद की लड़की से।

क्या आप सोचते हैं कि बहुत ज्यादा अंकुश रिश्ते को प्रभवित कर सकता है?

मैं इस विषय में उलझा हुआ हूं। रिश्ते में आप जब ज्यादा अंकुश रखते हैं, ज्यादा ध्यान रखते हैं और आपको अहसास होता है कि उस व्यक्ति को उतनी देखभाल की आवश्यकता नहीं है तो आप पीछे हट जाते हैं। (मजाकिया लहजे में) उदाहरण के तौर पर एक इलाके में एक कुत्ता रहता है और दूसरे इलाके में कुछ कुत्ते और एक कुतिया रहती है। उस एक कुतिया के पीछे जब दूसरे इलाके का कुत्ता आता है तो दूसरे कुत्ते उसे उठाकर फेंक देते हैं। इसे कहते हैं ख्याल रखना। प्यार से समझाओ, फिर कोड़ों से समझाओ और लोग फिर भी नहीं समझें तो उन्हें छोड़ दो। बाद में वे फिर आपके पास आएंगे, सबकी ट्रेन लेट चलती है और कभी-कभी तो विपरीत दिशा में भी चलती है।